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Saturday, October 17, 2015

क्या बकलोली करने में मोदी जी लालू यादव से हार गये?

एक खबर आ रही है बिहार में पहले चरण के मतदान में  उपेक्षित परिणाम नहीं आने की सम्बावना के चलते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी अपना बोरिया बिस्तर समेटना शुरू कर दिया गया है।

मोदी जी की कई रैलियां रद्द कर दी गई। पोस्टर और होर्डिंग्स पर से उनकी और अमित शाह की तस्वीर हटा कर स्थानीय नेताओ की फ़ोटो लगा दी गई।

क्या प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी जी का जादू नहीं चल पा रहा है फिर लालू प्रसाद यादव से बकलोली करने में हार गये।इधर कुछ दिनों से मोदी जी और लालू जी में जुबानी जंग तेज हो गई थी। लगता है मोदी जी लालू को अरविन्द केजरीवाल समझने की भूल कर बैठे थे कि केजरीवाल की तरह लालू कुछ नहीं बोलेगें लेकिन इस मामले में लालू मोदी के उस्ताद निकले।

कुछ वाकया- मोदी जी ने इशारों में लालू को शैतान कहा तो लालू ने मोदी जी को ब्रह्मपिशाच कह दिया। लालू जी एक कदम बढ़ाते हुये बधिया करने की बात कही तो इसके जवाब में गिरिराज सिंह कहा अगर लालू जी समय रहते अपना बधिया करा लेते तो उनका परिवार इतना बड़ा नहीं होता।

यह हर चुनावो में होता रहा है। दिल्ली विधानसभा इसका अपवाद रहा क्योकि अरविन्द केजरीवाल इन सब मुद्दों को दरकिनार करके मुद्दों पर ही कायम रहे।

लेकिन यह कहना बहुत मुश्किल है की बिहार विधानसभा में ऊँट किस करवट बैठेगा। 

Friday, August 21, 2015

Ex NSG Commando और दिल्ली कैंट से आम आदमी पार्टी के विधयाक सुरेन्द्र सिंह गिरफ्तार।

दिल्ली में आज आदमी पार्टी के लिहाज से बुरा दिन रहा। दो महत्वपूर्ण घटनायें घटी।

इस बात के कयास कई दिनों से लगाये जा रहे थे जीतेन्द्र तोमर के बाद आम आदमी पार्टी के अन्य विधायक किसी न किसी आरोप में गिरफ्तार किये जा सकते है।

कल शाम दिल्ली कैंट से आम आदमी पार्टी के विधायक और पूर्व NSG कमांडो सुरेन्द्र सिंह को NDMC के एक कर्मचारी के साथ मारपीट के आरोप और जाति सूचक शब्द इस्तेमाल करने पर गिरफ्तार कर लिया और आज सुबह अदालत में पेश किया जायेगा।

दूसरी बड़ी घटना एक आयोग बनाने को लेकर रही। पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित पर आरोप ऑटो में CNG किट लगाने को लेकर आरोप है जिसका खुलासा 2012 में हुआ था जिसमे LG नजीब जंग भी जाँच के घेरे में है।

कुछ दिन पहले ही दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने  एक सदस्यीय जाँच आयोग का गठन किया था और भारत सरकार के गृहमंत्रालय ने यह कहकर रोक लगा दी कि जाँच आयोग का गठन सिर्फ LG कर सकते है।

अब सवाल यह उठता है भला जिसके ऊपर खुद घोटाले का आरोप लगा हो वह भला खुद के खिलाफ जाँच आयोग का गठन क्यों करेगा।

क्या इससे मोदी सरकार के भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने की प्रतिबद्धता कमजोर नहीं होती है।

शाब्दिक त्रुटि के लिये मैं आप से अग्रिम माफ़ी मागता हूँ।

पढ़े और अपने कमेंट जरूर दे।