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Wednesday, November 14, 2018

साहेब हम भूले नहीं हैं…



आप थोड़ा सा पीछे जाइये और याद करिए वह दौर शेर हवाई जहाज और मोदी मोदी करती हुयी भीड़ और मोदी मोदी करती हुई भीड़ के बीच वह उत्साह से भरी आवाज।

मसलन सौगंध मुझे इस मिट्टी की मैं देश नहीं झुकने दूंगा मैं देश नहीं मिटने दूंगा।
आपने कोई है भाई जिसको दिल्ली सरकारी नौकरी दी हो.
यह काला धन वापस आना चाहिए.
कांग्रेस भ्रष्टाचार की पहचान बन गई है.
भारत को फिर से विश्वगुरु बनाना है.
यह जवान और किसान कांग्रेस के शासन में सुरक्षित हैं क्या.

अद्भुत चीज थी यह क्योंकि दागी राजनीतिक भ्रष्ट सिस्टम कांग्रेस युवा महिला किसान हर किसी की गुस्से को जुबान देने वाला एक नेता मिल गया था. वह नेता गांव शहर गली मोहल्ला कस्बा घूम घूम कर यही बता रहा था कि व्यवस्था चौपट हो चली है. तो जनादेश वाकई अद्भुत मिला. हर नेता की पोटली खाली कर दी थी उसने मायावती का दलित दौरा खत्म हो गया कांग्रेस का मुस्लिम तुष्टीकरण खत्म हो गया क्षेत्रीय पार्टियों की सियासत खत्म होने लगी जाति समीकरण धराशाई हो गए और जब संसद के चौखट को छुआ तो लगा लोकतंत्र के मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा हो गई. सब कुछ तो था हर सियासत नतमस्तक थी मौका ऐसा था कि वाकई देश को बचा जा सकता है नीतियों को नए सिरे से मत कर लागू किया जा सकता था बाजार को नए तरीके से खड़ा किया जा सकता था राष्ट्रीय पूजी को मौजूदा जरूरतों के हिसाब से खर्च किया जा सकता था गांव में स्वराज की अवधारणा लागू करने की दिशा में पढ़ा जा सकता था और प्रधानमंत्री बनने के बाद सेंट्रल हॉल में दिए गए पहले भाषण ने इस तरह की उम्मीदें को जगा दिया था.

फिर नीरव मोदी फरार हुआ साथ में मेहुल चौकसी भी फरार हुआयाद कीजिए सेंट्रल हॉल के पहले भाषण नरेंद्र मोदी के वाक्य "बेटा कभी भी मां पर कृपा नहीं कर सकता है वह समर्पित भाव से सिर्फ सेवा कर सकता है".

और वक्त के साथ नजारे बदलते गए मुंबई में नरेंद्र मोदी और देश के सबसे बड़े उद्योगपति मुकेश अंबानी के साथ तस्वीर ने कई सवालों को जन्म दिया. और उसके बाद देश को 9000 करोड रुपए का चूना लगा कर रही 11 ब्रीफकेस के साथ विजय माल्या दिन के उजाले में भाग और सियासत देखते रही. फिर नीरव मोदी फरार हुआ साथ में मेहुल चौकसी भी फरार हुआ. अब तक जानकारी के मुताबिक देश के 31 अरबपति देश को चुना लगाकर भाग चुके हैं. तो हर डायलॉग बेअसर से लगा. आखिर क्या कहा था मोदी जी ने लोकसभा चुनाव के समय भ्रष्टाचार के संबंध में “न खाऊंगा न खाने दूंगा भाई और बहनों मुझे प्रधानमंत्री नहीं मुझे चौकीदार बनाकर भेजिए मैं देश के खजाने पर कोई भी पंजा नहीं पड़ने दूंगा मुझे चौकीदार बना कर दीजिए”. तो क्या जोर शोर से जो बातें कही गई थी वह देश के नागरिकों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ था क्योंकि ऐसा कोई मुद्दा था ही नहीं जिसे 2014 में सत्ता पाने के लिए उठाया नहीं गया था और ऐसा कोई मुद्दा बचा ही नहीं जिस पर जो कहा गया उस पर कोई असर हुआ.

यह तथ्य उन तस्वीरों को लाते हैं जब यह लग रहा था कि देश में सब कुछ बदल रहा था लेकिन अब उन पर नजर डालिए जो मौजूदा दौर में हैं. मुसलमानों को भारतीय जनता पार्टी वोट बैंक नहीं मानती है लिहाजा उनके विकास या उनके पद से बीजेपी को कोई फर्क नहीं पड़ता है देश में दलितों के साथ क्या हुआ यह सब ने देखा हैदराबाद से लेकर गुजरात तक दलित उत्पीड़न की कहानियां सामने आई. विश्वविद्यालयों को हिंदुत्व और राष्ट्रवाद को प्रयोगशाला बना दिया गया हर साल करोड़ों युवाओं को रोजगार देने का वादा किया गया था लेकिन रोजगार देने की बात आई तो सलाह दी गई की पकौड़े या नौकरी के पीछे भागने की बजाय पान की दुकान लगाएं।

किसानों की स्थिति किसी से छुपी नहीं है पिछले 4 वर्ष में ही लगभग 50000 किसानों ने आत्महत्या कर लिया इन सब के बावजूद किसानों के उत्थान के लिए सरकार ने जोर-शोर से फसल बीमा योजना शुरू किया लेकिन वह बीमा योजना किसानों को कम उद्योगपति को ज्यादा फायदा पहुंचाने लगी. कृषि विशेषज्ञ पी. साईंनाथ कहा- मोदी सरकार की फसल बीमा योजना राफेल से बड़ा घोटाला है. महाराष्ट्र का उदाहरण देते हुए साईंनाथ ने कहा, "2.80 लाख किसानों ने सोयाबीन की खेती की. एक जिले में किसानों ने 19.2 करोड़ रुपये का भुगतान किया. राज्य सरकार और केंद्र सरकार ने 77-77 करोड़ रुपये का भुगतान किया. कुल राशि 173 करोड़ रुपये हुई जो रिलायंस बीमा को भुगतान किया गया". उन्होंने कहा, "पूरी फसल खराब हो गई और बीमा कंपनी ने दावों का भुगतान किया. रिलायंस ने एक जिले में 30 करोड़ रुपये का भुगतान किया और उसे शुद्ध लाभ 143 करोड़ रुपये हुआ, जबकि उसका निवेश एक भी रुपया नहीं था".

सड़क से किसानों की आवाज आई संसद से नेताओं की आवाज आई विश्वविद्यालयों से छात्रों की आवाज आए देश के हर चौराहे नुक्कड़ से युवाओं की आवाज आएगी और न्यायपालिका की चौखट से माननीय जजों की.

2014 से लेकर 2017 तक करीब 12700 बैंक फ्रॉड हो गए. जिससे गरीब देश को 17500 हजार करोड़ का चूना लगा. नोटबंदी के बाद पहले 4 महीने में करीब 1500000 लोगों की नौकरियां चली गई. नोटबंदी के बाद पहले 4 महीने में करीब 1500000 लोगों की नौकरियां चली गई लोगों बड़े शहरों से छोटे शहरों की तरफ से पलायन करने के मजबूर हो गए उनका रोजगार खत्म हो गया और उनके सामने रोजी रोटी कमाने और परिवार का पेट भरने की चुनौती पैदा हो गयी. रिजर्व बैंक ने कहा कि नोटबंदी के बाद 16000 करोड रूपया वापस आ गए लेकिन उससे 21000 करोड रुपए के नए नोट छापे पड़े क्योंकि नोटबंदी के बाद 99 परसेंट नोट ओं बैंक में वापस आ गए. इस बीच एक और जिसने जनता की कमर को तोड़ दिया था वह थी डीजल और पेट्रोल की बढ़ती हुई कीमतें चुनाव के पहले कहा गया था ना कि शक्ल में की बहुत तो हुआ पेट्रोल-डीजल के महंगाई की मार अबकी बार मोदी सरकार. और यह सब तब हुआ जब वह कच्चा तेल अपनी न्यूनतम स्तर पर था. 2014 के बाद से ही हर बरस सरकार दिल पर लगे हुए टैक्स से करीब साढ़े लाख करोड़ करोड रुपए कमाए. आखिर कहीं तो चूक हुई कुछ तो कमी आ रही यही वजह रही कि युवा नौकरी के लिए सड़कों पर उतर आए. इस पर रोक लेबर ऑर्गेनाइजेशन ने आंकड़े जारी किए कि पिच 14 2014 से लेकर 2017 तक का गरीबो 8:30 लाख नौकरियां दी गई यानी बेरोजगारी दर ३.४१ प्रतिशत से बढ़कर कर 6.23 % पर पहुंच गई. लेकिन रोजगार की दिशा में उचित कदम बढ़ाने के बजाय प्रधानमंत्री से लेकर पार्टी अध्यक्ष खामोश रहे. बाद में संसद में पार्टी अध्यक्ष ने कहा कि बेरोजगारी रहने से अच्छा है कि युवक को मजदूरी करके पेट पाले युवक पकौड़े बेचकर पेट पाले.

साढ़े चार बरस तक सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी रही विज्ञान भवन में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा. और इसके बाद से संघ विश्व हिंदू परिषद बीजेपी साधु संत समाज अचानक से जाग उठा और राम मंदिर बनाने के प्रति सरकार पर अध्यादेश लाने का दबाव डालने लगा.

सभी मुद्दों को लेकर क्या वास्तव में सरकार गंभीर है हमें यह सोच रहा होगा

Saturday, February 20, 2016

राष्ट्रवाद का मतलब है बड़े बड़े झंडे फहराना और दक्षिणपंथी विचारधारा की सोच के करीब महापुरषों की मुर्तिया बनवाना।

अगर इंसान के आयु के एवज में देखा जाय तो हिंदुस्तान बूढ़ा होने के करीब आया लेकिन आज लोगों को बुनियादी सुविधायें मसलन खाना, पानी, रोजगार, बिजली,सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा नहीं मिल पाई है।

               कांग्रेस के दस साल के शासन और उसमे हुये घोटाले से जनता त्रस्त हो चुकी थी। लोकसभा चुनाव के पहले यह उम्मीद थी कि बनने वाली आगामी सरकार लोगों को इन सभी समस्याओं से छुटकारा दिलायेगी। इस बीच नरेंद्र मोदी गुजरात में लगातार तीन बार विधानसभा चुनाव जीतकर राष्ट्रीय स्तर पर एक अलग पहचान बना ली थी। उनकी पहचान एक विकास पुरुष और नीतियों के आधार पर कड़क फैसला लेने वाले की बन गई थी।

                आरएसएस की राजनितिक इकाई बीजेपी ने भाजपा के तमाम बड़े और कद्दावर नेता मसलन लालकृष्ण अडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, राजनाथ और अरुण जेटली जैसे राष्ट्रीय नेताओ को दरकिनार कर नरेंद्र मोदी को अपना प्रधानमंत्री उम्मीदवार बनाया और उसी के बाद से देश की राजनीती विकास के बदले विचारधारा की लड़ाई में तब्दील ही गई।

                लोकसभा चुनाव के ठीक पहले यह मुद्दा उठा कि अगर नेहरू की जगह सरदार बल्लभ भाई पटेल अगर देश के प्रधानमंत्री होते तो कश्मीर समस्या नहीं होती मतलब साफ है कि चुनाव को नेहरू बनाम पटेल बनाने की कोशिश की गई उसी की फलस्वरूप बीजेपी और मोदी जी ने तय किया कि अगर बीजेपी की सरकार बनती है तो अहमदबाद में लौह पुरुष सरदार बल्लभ भाई पटेल की मूर्ति बनाई जायेगी जिसमे हज़ारो करोड़ो रूपये लग रहे है।

                 लेकिन चुनाव के करीब दो साल बाद भी हालात बदले नहीं है। हाल ही में जवाहर लाल नेहरू विश्विद्यालय का ही मामला ले लीजिये। विश्वविद्यालय को आतंक का गढ़ बताया जा रहा है और एक खास विचारधारा को कुचलने की कोशिश की जा रही है। जेनयू के छात्रों को देखिये खाकी कुर्ता, पैरों में हवाई चप्पल और एक झोला। यहाँ से पास हुआ छात्र समाज को बदलने के लिये काम करता है जब कि दूसरे विश्वविद्यालयों से पास छात्र और छात्रायें (सभी नहीं) पैसा बनाने के लिये काम करते हैं।

               जेनयू अपने आप में एक सोच है, विचारधारा है किसी भी मुद्दे के सभी पहलुओं पर बात करना देशद्रोह कैसे हो सकता है। पूँजीवादी, सामन्तवादी और फाँसीवादी विचारधारा को उखाड़ने की सोच आतंकवादी सोच का पर्याय कैसे हो सकता है। जेनयू में जो कुछ हुआ वह चिंता का विषय है।

               और दूसरे भारत सरकार में शिक्षा मंत्री ने सभी विश्वविद्यालाओं को आदेश दिया कि वह अपने कैंपस में तिरंगा फहराये। वह सब तो ठीक है लेकिन क्या महज तिरंगा फहराने से काम चल जायेगा। तिरंगा फहराने और उसके सम्मान का भाव लोगो में कैसे आयेगा और अगर छात्र और छत्राओं के अंदर देशभक्ति की भावना भरनी है तो देश की सभी स्कूलों, कॉलेज और हर शिक्षण संसथान में होना चाहिये।

                 एक चैनल पर देखा कि जेनयू मुद्दे पर प्रदर्शन कर रहे एक वकील से सवाल किया गया तो उसने कहा "पहले वन्देमातरम का नारा लगाओ, भारत माता की जय बोलो"। उन जनाब को यह भी नहीं पता इस देश में रहने वाला हर नागरिक अपने देश को चूमता है उसे किसी के सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है।

Monday, October 5, 2015

आज़म खान को एक खुला पत्र! पाकिस्तान की तरह वर्ताव कर रहे है आजम खान!

आज़म खान के नाम एक खुला पत्र!

पाकिस्तान की तरह व्यवहार कर रहे है आज़म खान!

कल एक ख़बर आई दादरी घटना को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और मुसलमानों के सबसे बड़े रहनुमा  आज़म खान ने UNO यानि संयुक्त राष्ट्र को चिट्ठी लिखी इन सब के बावजूद कि यह घटना भारत का पूरी तरह से आंतरिक ममला है। इस घटना की निंदा सभी समाज, सम्प्रदाय और प्रबुद्ध वर्ग के लोगों ने अपने अपने तरीके से किया।

आज़म खान के इस वर्ताव को पाकिस्तान के उस कृत्य से तुलना की जाय जिसमे वह कश्मीर मसले को लेकर UNO चले जाता है तो कम नहीं होगा। आज़म खान से मैं यह उम्मीद करता हूँ कि दादरी घटना के साथ नीचे दी हुई घटना को भी लिखा होगा।  

- किस तरह से इस्लाम को मानने वाले मुग़ल शासको ने हमारी विरासत को तोडा तहस नहस किया और हिन्दूओ को अपनी क्रूरता के बल पर इस्लाम में परिवर्तित कराया। 

- किस तरह से आजादी के समय बटवारे के दौरान इस्लाम को मानने वाले लोगों ने सिक्खों और हिन्दुओ के माँ बहनो के साथ घृणित काम किया और उनका बेरहमी से खून किया।  

- उन्होंने यह भी लिखा होगा 1992 में मुम्बई में बम धमाके करवा कर सैकड़ो मौसमो की जान लेने वाले किस धर्म को मानने वाले थे।  

-उन्होंने यह भी लिखा होगा कश्मीर में कश्मीरी पंडितो को अपने ज़मीन हक़ से जुदा करने वाले कौन लोग है और आज भी कश्मीरी पंडित अपने ही देश में शरणार्थी की तरह रह रहे है।  

- आज़म खान को यह भी लिखना चाहिए किस तरह से 2002 में गोधरा स्टेशन पर ट्रेन के दरवाजे बंद कर कारसेवकों को जिन्दा जला दिया गया था वह किस धर्म को फॉलो करने वाले लोग थे।  

- आज़म खान को यह भी बताना चाहिए कश्मीर में आये दिन पाकिस्तान और isi का झंडा किस धर्म और सम्प्रदाय के लोग कर रहे हैं।  

आज़म खान साहब मझे जावेद अख़्तर साहब का एक स्टेटमेंट याद आ रहा है जिसमें उन्होने ने कहा था "आप एक बार पाकिस्तान और कट्टर इस्लामिक देशो का दौरा करके आइये यहाँ की धरती को चूमेंगे" और आप हमारे अंदरूनी मसले को UNO में ले जा रहे है। आप मुसलमानो के रहनुमा है या इंसानियत के। आप के अनुसार इस देश में मुसलमानो के साथ अत्यचार हो रहा है उससे कम दलितों और पिछड़ों पर नहीं हो रहा है। क्या आप ने उनके आवाज़ को उठाने की कोशिश की। अगर आप जैसे नेता को मौका मिले इस देश को इस्लामिक मुल्क बना दिया जाय तो क्या मना कर देंगे।  

एक सप्ताह पहले ही हुई घटना को मैं भुला नहीं हूँ जिसमे एक मुस्लिम पिता ने छोटी से बच्ची को इस लिये मौत के घाट उतार दिया क्योकि उसका दुपट्टा सिर से उतर गया था। क्या आपने उस घट्ना की भर्त्सना की। इस मुल्क में मुस्लिम लड़कियां टी शर्ट और जीन्स भी पहनती है आप उनका पहनावा तय नहीं कर सकते।  

दादरी या इस तरह की दूसरी घटनाये भारत का अंदरूनी मामला है और जबकि आप ने इस मसले को अन्तर्राष्ट्रीय मंच पर उठाया है तो क्या अखिलेश सरकार आरोपी युवको पर मुकदमा उठाने की इजाज़त देगी क्योकि मसला UNO में है। इस मामले में गिरफ्तार युवको को छोड़ दिया जायेगा क्योकि मामला UNO में है।  

मैं निजी तौर आपके इस कृत्य की निंदा करता हूँ। हिंदुस्तान में किसी भी सेक्टर में हिन्दू मुसलमानो को बराबर का दर्जा दिया जाता है। आज इस देश में मुसलमान भी हर क्षेत्र में सर्वोच्च पदों पर बैठा हुआ है। कृपया हिन्दू- मुसलमान के आधार पर इस समाज को मत बांटिये। 

इस बात को स्वीकार करना पड़ेगा आज मुस्लिम समाज रूढ़िवादियों और इस्लाम के कुछ कट्टर नियम कानून से बधा पड़ा है उनसे मुसलमानो को मुक्त कराईये और उन्हें उदारवादी प्रवित्ति की तरफ मोड़िये। 

Friday, August 21, 2015

Ex NSG Commando और दिल्ली कैंट से आम आदमी पार्टी के विधयाक सुरेन्द्र सिंह गिरफ्तार।

दिल्ली में आज आदमी पार्टी के लिहाज से बुरा दिन रहा। दो महत्वपूर्ण घटनायें घटी।

इस बात के कयास कई दिनों से लगाये जा रहे थे जीतेन्द्र तोमर के बाद आम आदमी पार्टी के अन्य विधायक किसी न किसी आरोप में गिरफ्तार किये जा सकते है।

कल शाम दिल्ली कैंट से आम आदमी पार्टी के विधायक और पूर्व NSG कमांडो सुरेन्द्र सिंह को NDMC के एक कर्मचारी के साथ मारपीट के आरोप और जाति सूचक शब्द इस्तेमाल करने पर गिरफ्तार कर लिया और आज सुबह अदालत में पेश किया जायेगा।

दूसरी बड़ी घटना एक आयोग बनाने को लेकर रही। पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित पर आरोप ऑटो में CNG किट लगाने को लेकर आरोप है जिसका खुलासा 2012 में हुआ था जिसमे LG नजीब जंग भी जाँच के घेरे में है।

कुछ दिन पहले ही दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने  एक सदस्यीय जाँच आयोग का गठन किया था और भारत सरकार के गृहमंत्रालय ने यह कहकर रोक लगा दी कि जाँच आयोग का गठन सिर्फ LG कर सकते है।

अब सवाल यह उठता है भला जिसके ऊपर खुद घोटाले का आरोप लगा हो वह भला खुद के खिलाफ जाँच आयोग का गठन क्यों करेगा।

क्या इससे मोदी सरकार के भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने की प्रतिबद्धता कमजोर नहीं होती है।

शाब्दिक त्रुटि के लिये मैं आप से अग्रिम माफ़ी मागता हूँ।

पढ़े और अपने कमेंट जरूर दे।

Tuesday, April 8, 2014

तमाचा अरविन्द जी को नही बल्कि उन देशवासियों को मारा गया है

आज अरविन्द जी पर सुनोयोजित ढंग से किये गये हमले को जिस किसी ने भी अपने टीवी सेट पर देखा होगा और उस लाली नामक व्यक्ति की बातें सुनी होंगी एक साधारण बुद्धि का व्यक्ति भी समझ सकता है के इसके पीछे किसका हाथ हो सकता है! जो लोग भी इसका मजाक बना रहे हैं या हंस रहे हैं उन्हें नही भूलना चाहिये के यह तमाचा अरविन्द जी को नही बल्कि उन देशवासियों को मारा गया है जो देश हित की सोंचते है, जो वास्तव मे समझते है के हमारे सिस्टम मे गंभीरता के साथ बदलाव की जरूरत है ! इस तमाचे से अरविन्द जी के आँखों से आंसू शायद नही निकले हों लेकिन देश के कोने कोने से उनके चाहने वालों के आँखों से आंसू आज जरूर निकले हैं !

है किसी मे हिम्मत जो किसी राजनेता को आँखें भी दिखा सके? मारना तो बहुत दूर की चीज है! क्या कभी किसी सरकारी बाबू को आपने उंगलियाँ मात्र भी दिखाई होंगी जो आपसे रिश्वत की मांग करते हैं ?अरे तमाचे ही मारने हैं तो उस खोखली सिस्टम को मारो जिसका शिकार हम आये दिन होते रहते हैं! यह तो चुनाव का मेला है,इस मेले मे नेताओं के अलावा ऐसे भी लोग होते हैं जो किसी पार्टी विशेस के सत्तारूढ़ होने पर अपना निजी स्वार्थ सिद्ध होता देखते हैं! ऐसे लोग भोले- भले लोगों को बड़े आसनी के साथ ऐसे मुद्दों मे उलझा देते हैं जिससे वो चाह कर भी नही निकल पाते! और इस तरह हमारे उपर वास्तविक मुद्दों की जगह एक मास्क लगा दिया जाता है जिसमे उलझ कर हम रह जाते हैं ! फिर अगले 5 सालों तक हम ऐसी सिस्टम को कोसते रहते हैं ! 

लेकिन 2014 का लोकसभा चुनाव कुछ अलग होगा, अगर इसमे सच पराजित होता है तो यह हमारी पराजय है,यह दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्रा की पराजय होगी! ऐसे मे हम खुद से भी नज़र मिलाने का साहस नही कर पायेंगे हम दोष भी किसे देंगे खुद को या पक्षपातपूर्णा रवैया रखने वाले कुछ मीडिया हाउस को ? हमने 67 सालों से दूसरों पर भरोसा किया है इस बार आम आदमी पार्टी पर अपना भरोसा दिखाएं, जो वास्तव मे हमारे लिये लड रही है साथ ही हम अपने बहुमूल्या मताधिकार का प्रयोग करें और ज्यादा से ज्यादा ईमानदार पृष्ठभूमि के लोगों को संसद मे पहुंचाने मे अपनी महत्तवपूर्णा भागीदारी सुनिश्चित करें, निश्चय ही हमारा यह कदम उगते हुये एक नवीन भारत का प्रतीक बनेगा !

अंत मे में निजी तौर पर कहना चाहती हूँ के में आम आदमी पार्टी के विचारों और सिद्धान्तों से प्रेरित तो हूँ लेकिन सदस्या नहीं, में आप जैसे लोगों मे से ही हूँ ! अगर ऐसे विचार और सिद्धांत मुझे अन्या पार्टी मे दिखने को मिले तो निश्चय ही मेरा समर्थन उसके लिये होगा !
जय हिन्द, जय अरविन्द

Saturday, December 28, 2013

हर कोई राम लीला मैदान के तरफ बढ़ रहा था ऐतिहासिक छड़ का हिस्सा बनाने के लिए- 28 Dec-2012

कल  यानि २८ दिसंबर करीब ग्यारह बजे बस ने  गांधी शांति प्रतिष्ठान के पास छोड़ा। जिसे देखो हर कोई राम लीला मैदान के तरफ बढ़ रहा था ऐतिहासिक छड़ का हिस्सा बनाने के लिए।   ११.२० बजे कई ऐतिहासिक घटनाओं के गवाह उस मैदान में मौजूद था जहाँ कुछ देर बार दिल्ली के सबसे युवा & सातवें मुख्यमंत्री शपथ लेने वाले थे। पूरा रामलीला मैदान आम आदमी से खचा-खच भरा हुआ था। इसके लिए न तो बसों को किराये पर लाया गया था और न ही रेल गाड़ियों कि बुकिंग की गयी थी लेकिन उमड़ा हुआ जन सैलाब देख कर अनायास ही टीवी पर देखा हुआ १९४७ और जे पी आंदोलन की तस्वीरें याद आ गई फर्क बस इतना है कि वो ब्लैक & वाइट तस्वीरे थी और ये रंगीन।

अलग ही जूनून था।  अलग ही उत्साह था।  इस तस्वीर ने और अरविन्द के मंच से किये गए भराष्ट्राचार के खिलाफ शखनाद ने मौजूदा राजनितिक पार्टियों खासकर बीजेपी में खलबली मचा कर रख दी।  भड़ास तो निकलनी थी  तो सो निकली भी गडकरी के मुह से लेकिन बिना सिर-पैर कि और अब पता चल रहा है अरविन्द का डुलिकेट ढूढ़ा जा रहा है  ताकि एक दिल्ली के बड़े होटल में उसका नाट्य रूपांतरण कि जा सके ।

और आज मुझे इस बात का गर्व है , फक्र महसूस कर रहा हूँ  कि मै २०११ अगस्त क्रांति  ,२०१२  युवा क्रांति  का हिस्सा रहा  हूँ। 

बीते सालों के क्रांतिओं और आम आदमिओं के जूनून ने बता दिया है परिवर्तन हो कर रहेगा।


जय हिन्द, जय आप, जय आम आदमी।