कलम की ताकत ऐसी ताकत है जो समाज में बिना एक बूँद खून बहाए समाज में क्रांति ला सकती है. लेकिन इसका असर सामने तब आता है जब यह बने 'जनता की आवाज़' यानी "आप की आवाज़ ".
Wednesday, November 14, 2018
साहेब हम भूले नहीं हैं…
Saturday, February 20, 2016
राष्ट्रवाद का मतलब है बड़े बड़े झंडे फहराना और दक्षिणपंथी विचारधारा की सोच के करीब महापुरषों की मुर्तिया बनवाना।
अगर इंसान के आयु के एवज में देखा जाय तो हिंदुस्तान बूढ़ा होने के करीब आया लेकिन आज लोगों को बुनियादी सुविधायें मसलन खाना, पानी, रोजगार, बिजली,सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा नहीं मिल पाई है।
कांग्रेस के दस साल के शासन और उसमे हुये घोटाले से जनता त्रस्त हो चुकी थी। लोकसभा चुनाव के पहले यह उम्मीद थी कि बनने वाली आगामी सरकार लोगों को इन सभी समस्याओं से छुटकारा दिलायेगी। इस बीच नरेंद्र मोदी गुजरात में लगातार तीन बार विधानसभा चुनाव जीतकर राष्ट्रीय स्तर पर एक अलग पहचान बना ली थी। उनकी पहचान एक विकास पुरुष और नीतियों के आधार पर कड़क फैसला लेने वाले की बन गई थी।
आरएसएस की राजनितिक इकाई बीजेपी ने भाजपा के तमाम बड़े और कद्दावर नेता मसलन लालकृष्ण अडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, राजनाथ और अरुण जेटली जैसे राष्ट्रीय नेताओ को दरकिनार कर नरेंद्र मोदी को अपना प्रधानमंत्री उम्मीदवार बनाया और उसी के बाद से देश की राजनीती विकास के बदले विचारधारा की लड़ाई में तब्दील ही गई।
लोकसभा चुनाव के ठीक पहले यह मुद्दा उठा कि अगर नेहरू की जगह सरदार बल्लभ भाई पटेल अगर देश के प्रधानमंत्री होते तो कश्मीर समस्या नहीं होती मतलब साफ है कि चुनाव को नेहरू बनाम पटेल बनाने की कोशिश की गई उसी की फलस्वरूप बीजेपी और मोदी जी ने तय किया कि अगर बीजेपी की सरकार बनती है तो अहमदबाद में लौह पुरुष सरदार बल्लभ भाई पटेल की मूर्ति बनाई जायेगी जिसमे हज़ारो करोड़ो रूपये लग रहे है।
लेकिन चुनाव के करीब दो साल बाद भी हालात बदले नहीं है। हाल ही में जवाहर लाल नेहरू विश्विद्यालय का ही मामला ले लीजिये। विश्वविद्यालय को आतंक का गढ़ बताया जा रहा है और एक खास विचारधारा को कुचलने की कोशिश की जा रही है। जेनयू के छात्रों को देखिये खाकी कुर्ता, पैरों में हवाई चप्पल और एक झोला। यहाँ से पास हुआ छात्र समाज को बदलने के लिये काम करता है जब कि दूसरे विश्वविद्यालयों से पास छात्र और छात्रायें (सभी नहीं) पैसा बनाने के लिये काम करते हैं।
जेनयू अपने आप में एक सोच है, विचारधारा है किसी भी मुद्दे के सभी पहलुओं पर बात करना देशद्रोह कैसे हो सकता है। पूँजीवादी, सामन्तवादी और फाँसीवादी विचारधारा को उखाड़ने की सोच आतंकवादी सोच का पर्याय कैसे हो सकता है। जेनयू में जो कुछ हुआ वह चिंता का विषय है।
और दूसरे भारत सरकार में शिक्षा मंत्री ने सभी विश्वविद्यालाओं को आदेश दिया कि वह अपने कैंपस में तिरंगा फहराये। वह सब तो ठीक है लेकिन क्या महज तिरंगा फहराने से काम चल जायेगा। तिरंगा फहराने और उसके सम्मान का भाव लोगो में कैसे आयेगा और अगर छात्र और छत्राओं के अंदर देशभक्ति की भावना भरनी है तो देश की सभी स्कूलों, कॉलेज और हर शिक्षण संसथान में होना चाहिये।
एक चैनल पर देखा कि जेनयू मुद्दे पर प्रदर्शन कर रहे एक वकील से सवाल किया गया तो उसने कहा "पहले वन्देमातरम का नारा लगाओ, भारत माता की जय बोलो"। उन जनाब को यह भी नहीं पता इस देश में रहने वाला हर नागरिक अपने देश को चूमता है उसे किसी के सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है।
Monday, October 5, 2015
आज़म खान को एक खुला पत्र! पाकिस्तान की तरह वर्ताव कर रहे है आजम खान!
आज़म खान के नाम एक खुला पत्र!
पाकिस्तान की तरह व्यवहार कर रहे है आज़म खान!
कल एक ख़बर आई दादरी घटना को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और मुसलमानों के सबसे बड़े रहनुमा आज़म खान ने UNO यानि संयुक्त राष्ट्र को चिट्ठी लिखी इन सब के बावजूद कि यह घटना भारत का पूरी तरह से आंतरिक ममला है। इस घटना की निंदा सभी समाज, सम्प्रदाय और प्रबुद्ध वर्ग के लोगों ने अपने अपने तरीके से किया।
आज़म खान के इस वर्ताव को पाकिस्तान के उस कृत्य से तुलना की जाय जिसमे वह कश्मीर मसले को लेकर UNO चले जाता है तो कम नहीं होगा। आज़म खान से मैं यह उम्मीद करता हूँ कि दादरी घटना के साथ नीचे दी हुई घटना को भी लिखा होगा।
- किस तरह से इस्लाम को मानने वाले मुग़ल शासको ने हमारी विरासत को तोडा तहस नहस किया और हिन्दूओ को अपनी क्रूरता के बल पर इस्लाम में परिवर्तित कराया।
- किस तरह से आजादी के समय बटवारे के दौरान इस्लाम को मानने वाले लोगों ने सिक्खों और हिन्दुओ के माँ बहनो के साथ घृणित काम किया और उनका बेरहमी से खून किया।
- उन्होंने यह भी लिखा होगा 1992 में मुम्बई में बम धमाके करवा कर सैकड़ो मौसमो की जान लेने वाले किस धर्म को मानने वाले थे।
-उन्होंने यह भी लिखा होगा कश्मीर में कश्मीरी पंडितो को अपने ज़मीन हक़ से जुदा करने वाले कौन लोग है और आज भी कश्मीरी पंडित अपने ही देश में शरणार्थी की तरह रह रहे है।
- आज़म खान को यह भी लिखना चाहिए किस तरह से 2002 में गोधरा स्टेशन पर ट्रेन के दरवाजे बंद कर कारसेवकों को जिन्दा जला दिया गया था वह किस धर्म को फॉलो करने वाले लोग थे।
- आज़म खान को यह भी बताना चाहिए कश्मीर में आये दिन पाकिस्तान और isi का झंडा किस धर्म और सम्प्रदाय के लोग कर रहे हैं।
आज़म खान साहब मझे जावेद अख़्तर साहब का एक स्टेटमेंट याद आ रहा है जिसमें उन्होने ने कहा था "आप एक बार पाकिस्तान और कट्टर इस्लामिक देशो का दौरा करके आइये यहाँ की धरती को चूमेंगे" और आप हमारे अंदरूनी मसले को UNO में ले जा रहे है। आप मुसलमानो के रहनुमा है या इंसानियत के। आप के अनुसार इस देश में मुसलमानो के साथ अत्यचार हो रहा है उससे कम दलितों और पिछड़ों पर नहीं हो रहा है। क्या आप ने उनके आवाज़ को उठाने की कोशिश की। अगर आप जैसे नेता को मौका मिले इस देश को इस्लामिक मुल्क बना दिया जाय तो क्या मना कर देंगे।
एक सप्ताह पहले ही हुई घटना को मैं भुला नहीं हूँ जिसमे एक मुस्लिम पिता ने छोटी से बच्ची को इस लिये मौत के घाट उतार दिया क्योकि उसका दुपट्टा सिर से उतर गया था। क्या आपने उस घट्ना की भर्त्सना की। इस मुल्क में मुस्लिम लड़कियां टी शर्ट और जीन्स भी पहनती है आप उनका पहनावा तय नहीं कर सकते।
दादरी या इस तरह की दूसरी घटनाये भारत का अंदरूनी मामला है और जबकि आप ने इस मसले को अन्तर्राष्ट्रीय मंच पर उठाया है तो क्या अखिलेश सरकार आरोपी युवको पर मुकदमा उठाने की इजाज़त देगी क्योकि मसला UNO में है। इस मामले में गिरफ्तार युवको को छोड़ दिया जायेगा क्योकि मामला UNO में है।
मैं निजी तौर आपके इस कृत्य की निंदा करता हूँ। हिंदुस्तान में किसी भी सेक्टर में हिन्दू मुसलमानो को बराबर का दर्जा दिया जाता है। आज इस देश में मुसलमान भी हर क्षेत्र में सर्वोच्च पदों पर बैठा हुआ है। कृपया हिन्दू- मुसलमान के आधार पर इस समाज को मत बांटिये।
इस बात को स्वीकार करना पड़ेगा आज मुस्लिम समाज रूढ़िवादियों और इस्लाम के कुछ कट्टर नियम कानून से बधा पड़ा है उनसे मुसलमानो को मुक्त कराईये और उन्हें उदारवादी प्रवित्ति की तरफ मोड़िये।
Friday, August 21, 2015
Ex NSG Commando और दिल्ली कैंट से आम आदमी पार्टी के विधयाक सुरेन्द्र सिंह गिरफ्तार।
दिल्ली में आज आदमी पार्टी के लिहाज से बुरा दिन रहा। दो महत्वपूर्ण घटनायें घटी।
इस बात के कयास कई दिनों से लगाये जा रहे थे जीतेन्द्र तोमर के बाद आम आदमी पार्टी के अन्य विधायक किसी न किसी आरोप में गिरफ्तार किये जा सकते है।
कल शाम दिल्ली कैंट से आम आदमी पार्टी के विधायक और पूर्व NSG कमांडो सुरेन्द्र सिंह को NDMC के एक कर्मचारी के साथ मारपीट के आरोप और जाति सूचक शब्द इस्तेमाल करने पर गिरफ्तार कर लिया और आज सुबह अदालत में पेश किया जायेगा।
दूसरी बड़ी घटना एक आयोग बनाने को लेकर रही। पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित पर आरोप ऑटो में CNG किट लगाने को लेकर आरोप है जिसका खुलासा 2012 में हुआ था जिसमे LG नजीब जंग भी जाँच के घेरे में है।
कुछ दिन पहले ही दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने एक सदस्यीय जाँच आयोग का गठन किया था और भारत सरकार के गृहमंत्रालय ने यह कहकर रोक लगा दी कि जाँच आयोग का गठन सिर्फ LG कर सकते है।
अब सवाल यह उठता है भला जिसके ऊपर खुद घोटाले का आरोप लगा हो वह भला खुद के खिलाफ जाँच आयोग का गठन क्यों करेगा।
क्या इससे मोदी सरकार के भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने की प्रतिबद्धता कमजोर नहीं होती है।
शाब्दिक त्रुटि के लिये मैं आप से अग्रिम माफ़ी मागता हूँ।
पढ़े और अपने कमेंट जरूर दे।
Tuesday, April 8, 2014
तमाचा अरविन्द जी को नही बल्कि उन देशवासियों को मारा गया है
है किसी मे हिम्मत जो किसी राजनेता को आँखें भी दिखा सके? मारना तो बहुत दूर की चीज है! क्या कभी किसी सरकारी बाबू को आपने उंगलियाँ मात्र भी दिखाई होंगी जो आपसे रिश्वत की मांग करते हैं ?अरे तमाचे ही मारने हैं तो उस खोखली सिस्टम को मारो जिसका शिकार हम आये दिन होते रहते हैं! यह तो चुनाव का मेला है,इस मेले मे नेताओं के अलावा ऐसे भी लोग होते हैं जो किसी पार्टी विशेस के सत्तारूढ़ होने पर अपना निजी स्वार्थ सिद्ध होता देखते हैं! ऐसे लोग भोले- भले लोगों को बड़े आसनी के साथ ऐसे मुद्दों मे उलझा देते हैं जिससे वो चाह कर भी नही निकल पाते! और इस तरह हमारे उपर वास्तविक मुद्दों की जगह एक मास्क लगा दिया जाता है जिसमे उलझ कर हम रह जाते हैं ! फिर अगले 5 सालों तक हम ऐसी सिस्टम को कोसते रहते हैं !
लेकिन 2014 का लोकसभा चुनाव कुछ अलग होगा, अगर इसमे सच पराजित होता है तो यह हमारी पराजय है,यह दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्रा की पराजय होगी! ऐसे मे हम खुद से भी नज़र मिलाने का साहस नही कर पायेंगे हम दोष भी किसे देंगे खुद को या पक्षपातपूर्णा रवैया रखने वाले कुछ मीडिया हाउस को ? हमने 67 सालों से दूसरों पर भरोसा किया है इस बार आम आदमी पार्टी पर अपना भरोसा दिखाएं, जो वास्तव मे हमारे लिये लड रही है साथ ही हम अपने बहुमूल्या मताधिकार का प्रयोग करें और ज्यादा से ज्यादा ईमानदार पृष्ठभूमि के लोगों को संसद मे पहुंचाने मे अपनी महत्तवपूर्णा भागीदारी सुनिश्चित करें, निश्चय ही हमारा यह कदम उगते हुये एक नवीन भारत का प्रतीक बनेगा !
अंत मे में निजी तौर पर कहना चाहती हूँ के में आम आदमी पार्टी के विचारों और सिद्धान्तों से प्रेरित तो हूँ लेकिन सदस्या नहीं, में आप जैसे लोगों मे से ही हूँ ! अगर ऐसे विचार और सिद्धांत मुझे अन्या पार्टी मे दिखने को मिले तो निश्चय ही मेरा समर्थन उसके लिये होगा !


