Wednesday, November 14, 2018

साहेब हम भूले नहीं हैं…



आप थोड़ा सा पीछे जाइये और याद करिए वह दौर शेर हवाई जहाज और मोदी मोदी करती हुयी भीड़ और मोदी मोदी करती हुई भीड़ के बीच वह उत्साह से भरी आवाज।

मसलन सौगंध मुझे इस मिट्टी की मैं देश नहीं झुकने दूंगा मैं देश नहीं मिटने दूंगा।
आपने कोई है भाई जिसको दिल्ली सरकारी नौकरी दी हो.
यह काला धन वापस आना चाहिए.
कांग्रेस भ्रष्टाचार की पहचान बन गई है.
भारत को फिर से विश्वगुरु बनाना है.
यह जवान और किसान कांग्रेस के शासन में सुरक्षित हैं क्या.

अद्भुत चीज थी यह क्योंकि दागी राजनीतिक भ्रष्ट सिस्टम कांग्रेस युवा महिला किसान हर किसी की गुस्से को जुबान देने वाला एक नेता मिल गया था. वह नेता गांव शहर गली मोहल्ला कस्बा घूम घूम कर यही बता रहा था कि व्यवस्था चौपट हो चली है. तो जनादेश वाकई अद्भुत मिला. हर नेता की पोटली खाली कर दी थी उसने मायावती का दलित दौरा खत्म हो गया कांग्रेस का मुस्लिम तुष्टीकरण खत्म हो गया क्षेत्रीय पार्टियों की सियासत खत्म होने लगी जाति समीकरण धराशाई हो गए और जब संसद के चौखट को छुआ तो लगा लोकतंत्र के मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा हो गई. सब कुछ तो था हर सियासत नतमस्तक थी मौका ऐसा था कि वाकई देश को बचा जा सकता है नीतियों को नए सिरे से मत कर लागू किया जा सकता था बाजार को नए तरीके से खड़ा किया जा सकता था राष्ट्रीय पूजी को मौजूदा जरूरतों के हिसाब से खर्च किया जा सकता था गांव में स्वराज की अवधारणा लागू करने की दिशा में पढ़ा जा सकता था और प्रधानमंत्री बनने के बाद सेंट्रल हॉल में दिए गए पहले भाषण ने इस तरह की उम्मीदें को जगा दिया था.

फिर नीरव मोदी फरार हुआ साथ में मेहुल चौकसी भी फरार हुआयाद कीजिए सेंट्रल हॉल के पहले भाषण नरेंद्र मोदी के वाक्य "बेटा कभी भी मां पर कृपा नहीं कर सकता है वह समर्पित भाव से सिर्फ सेवा कर सकता है".

और वक्त के साथ नजारे बदलते गए मुंबई में नरेंद्र मोदी और देश के सबसे बड़े उद्योगपति मुकेश अंबानी के साथ तस्वीर ने कई सवालों को जन्म दिया. और उसके बाद देश को 9000 करोड रुपए का चूना लगा कर रही 11 ब्रीफकेस के साथ विजय माल्या दिन के उजाले में भाग और सियासत देखते रही. फिर नीरव मोदी फरार हुआ साथ में मेहुल चौकसी भी फरार हुआ. अब तक जानकारी के मुताबिक देश के 31 अरबपति देश को चुना लगाकर भाग चुके हैं. तो हर डायलॉग बेअसर से लगा. आखिर क्या कहा था मोदी जी ने लोकसभा चुनाव के समय भ्रष्टाचार के संबंध में “न खाऊंगा न खाने दूंगा भाई और बहनों मुझे प्रधानमंत्री नहीं मुझे चौकीदार बनाकर भेजिए मैं देश के खजाने पर कोई भी पंजा नहीं पड़ने दूंगा मुझे चौकीदार बना कर दीजिए”. तो क्या जोर शोर से जो बातें कही गई थी वह देश के नागरिकों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ था क्योंकि ऐसा कोई मुद्दा था ही नहीं जिसे 2014 में सत्ता पाने के लिए उठाया नहीं गया था और ऐसा कोई मुद्दा बचा ही नहीं जिस पर जो कहा गया उस पर कोई असर हुआ.

यह तथ्य उन तस्वीरों को लाते हैं जब यह लग रहा था कि देश में सब कुछ बदल रहा था लेकिन अब उन पर नजर डालिए जो मौजूदा दौर में हैं. मुसलमानों को भारतीय जनता पार्टी वोट बैंक नहीं मानती है लिहाजा उनके विकास या उनके पद से बीजेपी को कोई फर्क नहीं पड़ता है देश में दलितों के साथ क्या हुआ यह सब ने देखा हैदराबाद से लेकर गुजरात तक दलित उत्पीड़न की कहानियां सामने आई. विश्वविद्यालयों को हिंदुत्व और राष्ट्रवाद को प्रयोगशाला बना दिया गया हर साल करोड़ों युवाओं को रोजगार देने का वादा किया गया था लेकिन रोजगार देने की बात आई तो सलाह दी गई की पकौड़े या नौकरी के पीछे भागने की बजाय पान की दुकान लगाएं।

किसानों की स्थिति किसी से छुपी नहीं है पिछले 4 वर्ष में ही लगभग 50000 किसानों ने आत्महत्या कर लिया इन सब के बावजूद किसानों के उत्थान के लिए सरकार ने जोर-शोर से फसल बीमा योजना शुरू किया लेकिन वह बीमा योजना किसानों को कम उद्योगपति को ज्यादा फायदा पहुंचाने लगी. कृषि विशेषज्ञ पी. साईंनाथ कहा- मोदी सरकार की फसल बीमा योजना राफेल से बड़ा घोटाला है. महाराष्ट्र का उदाहरण देते हुए साईंनाथ ने कहा, "2.80 लाख किसानों ने सोयाबीन की खेती की. एक जिले में किसानों ने 19.2 करोड़ रुपये का भुगतान किया. राज्य सरकार और केंद्र सरकार ने 77-77 करोड़ रुपये का भुगतान किया. कुल राशि 173 करोड़ रुपये हुई जो रिलायंस बीमा को भुगतान किया गया". उन्होंने कहा, "पूरी फसल खराब हो गई और बीमा कंपनी ने दावों का भुगतान किया. रिलायंस ने एक जिले में 30 करोड़ रुपये का भुगतान किया और उसे शुद्ध लाभ 143 करोड़ रुपये हुआ, जबकि उसका निवेश एक भी रुपया नहीं था".

सड़क से किसानों की आवाज आई संसद से नेताओं की आवाज आई विश्वविद्यालयों से छात्रों की आवाज आए देश के हर चौराहे नुक्कड़ से युवाओं की आवाज आएगी और न्यायपालिका की चौखट से माननीय जजों की.

2014 से लेकर 2017 तक करीब 12700 बैंक फ्रॉड हो गए. जिससे गरीब देश को 17500 हजार करोड़ का चूना लगा. नोटबंदी के बाद पहले 4 महीने में करीब 1500000 लोगों की नौकरियां चली गई. नोटबंदी के बाद पहले 4 महीने में करीब 1500000 लोगों की नौकरियां चली गई लोगों बड़े शहरों से छोटे शहरों की तरफ से पलायन करने के मजबूर हो गए उनका रोजगार खत्म हो गया और उनके सामने रोजी रोटी कमाने और परिवार का पेट भरने की चुनौती पैदा हो गयी. रिजर्व बैंक ने कहा कि नोटबंदी के बाद 16000 करोड रूपया वापस आ गए लेकिन उससे 21000 करोड रुपए के नए नोट छापे पड़े क्योंकि नोटबंदी के बाद 99 परसेंट नोट ओं बैंक में वापस आ गए. इस बीच एक और जिसने जनता की कमर को तोड़ दिया था वह थी डीजल और पेट्रोल की बढ़ती हुई कीमतें चुनाव के पहले कहा गया था ना कि शक्ल में की बहुत तो हुआ पेट्रोल-डीजल के महंगाई की मार अबकी बार मोदी सरकार. और यह सब तब हुआ जब वह कच्चा तेल अपनी न्यूनतम स्तर पर था. 2014 के बाद से ही हर बरस सरकार दिल पर लगे हुए टैक्स से करीब साढ़े लाख करोड़ करोड रुपए कमाए. आखिर कहीं तो चूक हुई कुछ तो कमी आ रही यही वजह रही कि युवा नौकरी के लिए सड़कों पर उतर आए. इस पर रोक लेबर ऑर्गेनाइजेशन ने आंकड़े जारी किए कि पिच 14 2014 से लेकर 2017 तक का गरीबो 8:30 लाख नौकरियां दी गई यानी बेरोजगारी दर ३.४१ प्रतिशत से बढ़कर कर 6.23 % पर पहुंच गई. लेकिन रोजगार की दिशा में उचित कदम बढ़ाने के बजाय प्रधानमंत्री से लेकर पार्टी अध्यक्ष खामोश रहे. बाद में संसद में पार्टी अध्यक्ष ने कहा कि बेरोजगारी रहने से अच्छा है कि युवक को मजदूरी करके पेट पाले युवक पकौड़े बेचकर पेट पाले.

साढ़े चार बरस तक सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी रही विज्ञान भवन में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा. और इसके बाद से संघ विश्व हिंदू परिषद बीजेपी साधु संत समाज अचानक से जाग उठा और राम मंदिर बनाने के प्रति सरकार पर अध्यादेश लाने का दबाव डालने लगा.

सभी मुद्दों को लेकर क्या वास्तव में सरकार गंभीर है हमें यह सोच रहा होगा

Tuesday, November 13, 2018

भारत में फेक न्यूज़ और उसका असर

भारत में फेक न्यूज़ और उसका असर

भारत में फेक न्यूज़ एक बड़ी समस्या बन गई है. आए दिन सोशल मीडिया पर तथ्यों की जांच-पड़ताल किए बिना राष्ट्रवाद, धर्म और आस्था के नाम पर लोग फेक न्यूज़ को शेयर कर रहे हैं.
कुछ दिन पहले राजस्थान में भाजपा के अध्यक्ष अमित शाह ने कार्यकर्ताओं से बात करते हुए कहां था "उनके कार्यकर्ता ने एक न्यूज़ को शेयर किया था वह खबर सही नहीं थी लेकिन देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गई और जमीन पर उसका बहुत बड़ा असर हुआ. तो क्या इसके यह मायने निकाला जाए कि फेक न्यूज़ एक एजेंडा के तहत शेयर किया जा रहा है.
आजादी के 70 साल बाद भी देश में तमाम समस्याएं हैं। मसलन बेरोजगारी, भुखमरी, गरीबी, किसान आत्महत्या, प्रदूषण, जनसंख्या, शिक्षा और स्वास्थ्य। लेकिन फिर भी इन समस्याओं पर बात करने के बजाय लोग 70 साल पहले जाकर यह क्यों जाना चाहते हैं कि नेहरू का धर्म क्या था उनका नाम क्या वाकई में जवाहरलाल नेहरू था या मोइन खान.
बीबीसी से बात करते हुए एक्ट्रेस स्वरा भास्कर कहते हैं ''आज जो बात अलग है, वो ये है कि जिस तरह की फ़ेक न्यूज़ की हम बात कर रहे हैं, वो संगठित और प्रायोजित है और इसमें एक एजेंडा छिपा हुआ है" .
अभिनेता प्रकाश राज ने कहा है कि फ़ेक न्यूज़ बहुत पहले से हो रही है, लेकिन अब ये काम संगठित तौर पर हो रहा है और इससे समाज को नुकसान होगा.
सामाजिक और राजनीतिक मुद्दे पर बेबाक राय रखने वाले वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार ने कहा" असली ख़बरों के बजाए आप कुछ और पढ़ रहे हैं. क़ाबिल पत्रकारों के हाथ बांध दिए गए हैं. अगर क़ाबिल पत्रकारों का साथ दिया गया तो वो ही इस लोकतंत्र को बदल देंगे. लेकिन भारत का मीडिया, बहुत होश-हवास में, सोच समझकर भारत के लोकतंत्र को बर्बाद कर रहा है. अख़बारों के संपादक, मालिक इस लोकतंत्र को बर्बाद करने में लगे हुए हैं. समझिए किस तरह से हिंदू-मुस्लिम नफ़रत की बातें हो रही हैं."
हलिया वर्षों में भारत में फेक न्यूज़ के आधार पर हिंसा में काफी इजाफा हुआ है दो घटनाएं अहम् है एक राजस्थान की और दूसरी उत्तर प्रदेश की. राजस्थान में अल्पसंख्यक वर्ग के एक शख्स को इस बिना पर मार दिया जाता है कि वह गाय की तस्करी कर रहा था और वही उत्तर प्रदेश में एक अल्पसंख्यक वर्ग के व्यक्ति को शक के आधार पर मार दिया जाता है कि उसने अपने फ्रिज में रखा हुआ था.
इन दोनों घटनाओं में एक बात समान थी वह सोशल मीडिया पर फेक न्यूज के आधार पर जानलेवा भीड़ का इकट्ठा होना.
ऐसा नहीं है फेक न्यूज़ के आधार पर इकट्ठी हुयी भीड़ का शिकार सिर्फ अल्पसंख्यक समुदाय के लोग बने. महाराष्ट्र में सोशल मीडिया पर बच्चा चोरी होने की अफवाह फैली इसके बाद कई घटनाएं हुई जहां पर कुछ लोगों की सिर्फ इस वजह से हत्या कर दी गई कि वह बच्चों से बात कर रहे थे और वह हिंदू समुदाय के थे.
वर्तमान में सोशल मीडिया पर फैलाए के झूठ और अफवाह से पटना सरकार के लिए चुनौती बनता जा रहा है. वर्तमान में देश में कहीं भी सांप्रदायिक हिंसा होती है तो सरकार इंटरनेट पर प्रतिबंध लगा देती है ताकि सोशल मीडिया पर कोई भी सोशल मीडिया इस बात की है कि किसी भी खबर को शेयर करने से पहले उसके तथ्यों को जांच परख लिया जाए

Saturday, May 21, 2016

...... आखिर कहा जायें यह सब महिलाये!

              पिछले तीन दिनों से जंतर मंतर पर कुछ महलायें जो उत्तर प्रदेश के बलिया जिले हैं, सामाजिक कार्यकर्त्ता ब्रजभूषण दुबे के अगुवाई में धरना दे रही हकी और सरकार तक अपनी बात पहुचाने की कोशिश कर रही हैं।

              करीब 26 महीने पहले इन महिलाओ के पति जो भारत पूर्वोत्तर राज्य मेघालय में रहते थे और वही रोजी रोटी के लिये चावल का व्यापार करते थे, कुछ उग्रवादियों ने इनका अपराण कर लिया। तब से लेकर आज तक यह महिलाये दर दर की ठोकरे खा रही है लेकिन इनकी सुनने वाला कोई नहीं है।

              इन लोगों ने स्थानीय प्रशासन से लेकर अपने जिले के विधायक, सांसद, मंत्री, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, देश के गृहमंत्री राजनाथ सिंह, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक से गुहार लगायी यहाँ तक कि राष्ट्रीय मानवाधिकार का भी दरवाजा खटखटाया लेकिन कोई भी रिस्पांस नहीं मिला।

                पिछले साल जब इन लोगो ने जंतर मंतर पर धरना दिया था और गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मिलकर अपनी बात कही थी तो उन्होंने इनको आश्वासन दिया था कि "आपके पतियों को उग्रवादियों से मुक्त कराया जायेगा और अगर जरूरत पड़ी तो उन्हें हेलीकाप्टर भेजकर वापस लाया जाऐगा"। लेकिन वह वादा महज हवा हवाई ही साबित हुआ।

               मन में तो सवाल उठता है कि आखिर कहा जाये यह महिलाये? कौन सा दरवाजा खटखटाये? किस काम का लंबे चौड़े वादे? किस काम का यह लोकतंत्र और किस काम का नयायपालिका।

              क्या पुलिस प्रशासन सिर्फ पैसे वालों की सुनाती है। अगर किसी शख्स के पास पैसे न हो क्या उसे न्याय नहीं मिल सकता है, पुलिस उसकी नहीं सुनेगी या फिर सरकार कोई संज्ञान नहीं लेगी। इनके पास छोटे छोटे बच्चे है, रोजी रोटी का कोई साधन नहीं है।

             इतने संवेदनशील मसला होने के बावजूद अभी तक सरकार के कानों पर जू तक नहीं रेंग रहा है। पुलिस प्रशासन और सरकार की यही उदासीनता या तो हथियार उठाने पर मजबूर देती है या फिर ऐसे लोगो जिंदगी जीने की आस छोड़ देते है।

          

             

Saturday, March 5, 2016

जेनयू के शोर शराबे में दब गई हरियाणा में घटित महिलाओ के जघन्य घटना!

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय परिसर में हुये कथित देशविरोधी कार्यक्रम और उससे उपजे विवाद की लपटों में "बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ" कार्यक्रम की शुरुआत करने वाला हरियाणा में जाट आंदोलन के दौरान हुयी हिंसा, हत्या, लूटपाट और महिलाओ के साथ अमानवीय, बलात्कार की घटना की खबर दब गई या फिर जानबूझकर दबा दी गई।

               आखिर इसकी वजह क्या है? हरियाणा की घटना को लेकर न तो आरएसएस की देशभक्ति या फिर राष्ट्रवाद की भावना को ठेस पहुची और न ही देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने इस सम्बन्ध में एक बयान देना भी उचित नहीं समझा उलटे उनके राज्य की पुलिस लगातार  इस बात से इंकार करती रही कि मुरथल में इस प्रकार की घटना भी हुई जबकि तत्कालीन परिस्थितियाँ चीख चीख कर इस बात की गवाही दे रही थी इस प्रकार के घटना को अंजाम दिया गया था।

                क्या यह माना जाय कि इसके पीछे आरएसएस या फिर मनोहर लाल खट्टर की स्त्री विरोधी सोच है या फिर इस घटना की सारी परते खुलने के बाद बीजेपी को देश में राजनितिक तौर पर नुकसान उठाना पड़ सकता था? क्या इस मामले की सच्चाई सामने आने के बाद जाहिर सी बात है जाट समुदाय के लोग फसते और मनोहर लाल खट्टर को उस जाट वोट बैंक को खोने का डर था जिसके उपर सवार होकर सत्ता की शिखर तक पहुचे थे? क्या इस मामले के खुलने के बाद बीजेपी को इस बात का डर था कि आगामी चुनावों में उसे सियासी तौर पर नुकसान हो सकता है?

               सबसे दिलचस्प और आश्चर्य की बात रही जहाँ भारत में विपक्षी पार्टियां इस प्रकार के घटना होने की बाँट जोहती रहती है लेकिन इस घटना के घटित होने के बाद भी कांग्रेस और उसके नेता चुप्पी का टेप मुँह पर चिपकाये रहे। क्या कांग्रेस भी कही न कही इस घटना प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस घटना में शामिल रही है?

शायद यही वजह रही कि बीजेपी के निचले पायदान के नेता से लेकर शीर्ष तक सभी ने चुप्पी साधे रखी और जेनयू घटना को लेकर सुलगती आग में फूक मरते रहे।
जो भी हो लेकिन आरोपियों को न्याय के कटघरे में लाना सरकार की नैतिक जिम्मेदारी और कर्तव्य भी है। 

               

Saturday, February 20, 2016

आपकी आवाज़: राष्ट्रवाद का मतलब है बड़े बड़े झंडे फहराना और दक्षिणपंथी विचारधारा की सोच के करीब महापुरषों की मुर्तिया बनवाना।

आपकी आवाज़: राष्ट्रवाद का मतलब है बड़े बड़े झंडे फहराना और दक्षिणपंथी विचारधारा की सोच के करीब महापुरषों की मुर्तिया बनवाना।




राष्ट्रवाद का मतलब है बड़े बड़े झंडे फहराना और दक्षिणपंथी विचारधारा की सोच के करीब महापुरषों की मुर्तिया बनवाना।

अगर इंसान के आयु के एवज में देखा जाय तो हिंदुस्तान बूढ़ा होने के करीब आया लेकिन आज लोगों को बुनियादी सुविधायें मसलन खाना, पानी, रोजगार, बिजली,सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा नहीं मिल पाई है।

               कांग्रेस के दस साल के शासन और उसमे हुये घोटाले से जनता त्रस्त हो चुकी थी। लोकसभा चुनाव के पहले यह उम्मीद थी कि बनने वाली आगामी सरकार लोगों को इन सभी समस्याओं से छुटकारा दिलायेगी। इस बीच नरेंद्र मोदी गुजरात में लगातार तीन बार विधानसभा चुनाव जीतकर राष्ट्रीय स्तर पर एक अलग पहचान बना ली थी। उनकी पहचान एक विकास पुरुष और नीतियों के आधार पर कड़क फैसला लेने वाले की बन गई थी।

                आरएसएस की राजनितिक इकाई बीजेपी ने भाजपा के तमाम बड़े और कद्दावर नेता मसलन लालकृष्ण अडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, राजनाथ और अरुण जेटली जैसे राष्ट्रीय नेताओ को दरकिनार कर नरेंद्र मोदी को अपना प्रधानमंत्री उम्मीदवार बनाया और उसी के बाद से देश की राजनीती विकास के बदले विचारधारा की लड़ाई में तब्दील ही गई।

                लोकसभा चुनाव के ठीक पहले यह मुद्दा उठा कि अगर नेहरू की जगह सरदार बल्लभ भाई पटेल अगर देश के प्रधानमंत्री होते तो कश्मीर समस्या नहीं होती मतलब साफ है कि चुनाव को नेहरू बनाम पटेल बनाने की कोशिश की गई उसी की फलस्वरूप बीजेपी और मोदी जी ने तय किया कि अगर बीजेपी की सरकार बनती है तो अहमदबाद में लौह पुरुष सरदार बल्लभ भाई पटेल की मूर्ति बनाई जायेगी जिसमे हज़ारो करोड़ो रूपये लग रहे है।

                 लेकिन चुनाव के करीब दो साल बाद भी हालात बदले नहीं है। हाल ही में जवाहर लाल नेहरू विश्विद्यालय का ही मामला ले लीजिये। विश्वविद्यालय को आतंक का गढ़ बताया जा रहा है और एक खास विचारधारा को कुचलने की कोशिश की जा रही है। जेनयू के छात्रों को देखिये खाकी कुर्ता, पैरों में हवाई चप्पल और एक झोला। यहाँ से पास हुआ छात्र समाज को बदलने के लिये काम करता है जब कि दूसरे विश्वविद्यालयों से पास छात्र और छात्रायें (सभी नहीं) पैसा बनाने के लिये काम करते हैं।

               जेनयू अपने आप में एक सोच है, विचारधारा है किसी भी मुद्दे के सभी पहलुओं पर बात करना देशद्रोह कैसे हो सकता है। पूँजीवादी, सामन्तवादी और फाँसीवादी विचारधारा को उखाड़ने की सोच आतंकवादी सोच का पर्याय कैसे हो सकता है। जेनयू में जो कुछ हुआ वह चिंता का विषय है।

               और दूसरे भारत सरकार में शिक्षा मंत्री ने सभी विश्वविद्यालाओं को आदेश दिया कि वह अपने कैंपस में तिरंगा फहराये। वह सब तो ठीक है लेकिन क्या महज तिरंगा फहराने से काम चल जायेगा। तिरंगा फहराने और उसके सम्मान का भाव लोगो में कैसे आयेगा और अगर छात्र और छत्राओं के अंदर देशभक्ति की भावना भरनी है तो देश की सभी स्कूलों, कॉलेज और हर शिक्षण संसथान में होना चाहिये।

                 एक चैनल पर देखा कि जेनयू मुद्दे पर प्रदर्शन कर रहे एक वकील से सवाल किया गया तो उसने कहा "पहले वन्देमातरम का नारा लगाओ, भारत माता की जय बोलो"। उन जनाब को यह भी नहीं पता इस देश में रहने वाला हर नागरिक अपने देश को चूमता है उसे किसी के सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है।

Tuesday, January 19, 2016

सियासत और इनके रहनुमाओं ने कानून को नपुंसक बना दिया है!

सियासत और इनके रहनुमाओं ने कानून को नपुंसक बना दिया है!

हैदराबाद में कथित तौर पर कुछ दलित छात्रो को हॉस्टल से बाहर निकालने के बाद उनमें से एक छात्र रोहित वेमुला ने आत्महत्या कर ली। इस मामले में यूनिवर्सिटी के कुलपति और इस घटना में शामिल सांसद की जिम्मेदारी सुनिश्चित करने के बजाय छात्र के ऊपर गंभीर आरोप लगाये जा रहे हैं।

मसलन, छात्र ने बीफ पार्टी का आयोजन किया था। याकूब मेनन के फांसी का विरोध किया था और कैंपस में गुंडा-गर्दी करता था। मतलब बचाव का बेहद बेहूदा तरीका अपनाया जा रहा है।

अब सवाल यह उठता है कि अगर उस छात्र ने कुछ ऐसा काम किया जिससे किसी नियम कानून का उलंघन हुआ तो विश्वविद्यालय प्रशासन ने उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की।

इस देश में अगर राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की हत्या करने वाले गोडसे की पूजा करने वाले हैं तो याकूब मेनन के फांसी का विरोध करने वाले भी हैं।

लेकिन बचाव का बेहद बेहूदा तरीका अपनाया जा रहा है।

Sunday, January 17, 2016

अरविन्द केजरीवाल के ऊपर स्याही फेंकी!

Odd Even कार्यक्रम के दौरान दिल्ली के मुख्यमंत्री के ऊपर स्याही फेंकी।

Saturday, October 17, 2015

क्या बकलोली करने में मोदी जी लालू यादव से हार गये?

एक खबर आ रही है बिहार में पहले चरण के मतदान में  उपेक्षित परिणाम नहीं आने की सम्बावना के चलते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी अपना बोरिया बिस्तर समेटना शुरू कर दिया गया है।

मोदी जी की कई रैलियां रद्द कर दी गई। पोस्टर और होर्डिंग्स पर से उनकी और अमित शाह की तस्वीर हटा कर स्थानीय नेताओ की फ़ोटो लगा दी गई।

क्या प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी जी का जादू नहीं चल पा रहा है फिर लालू प्रसाद यादव से बकलोली करने में हार गये।इधर कुछ दिनों से मोदी जी और लालू जी में जुबानी जंग तेज हो गई थी। लगता है मोदी जी लालू को अरविन्द केजरीवाल समझने की भूल कर बैठे थे कि केजरीवाल की तरह लालू कुछ नहीं बोलेगें लेकिन इस मामले में लालू मोदी के उस्ताद निकले।

कुछ वाकया- मोदी जी ने इशारों में लालू को शैतान कहा तो लालू ने मोदी जी को ब्रह्मपिशाच कह दिया। लालू जी एक कदम बढ़ाते हुये बधिया करने की बात कही तो इसके जवाब में गिरिराज सिंह कहा अगर लालू जी समय रहते अपना बधिया करा लेते तो उनका परिवार इतना बड़ा नहीं होता।

यह हर चुनावो में होता रहा है। दिल्ली विधानसभा इसका अपवाद रहा क्योकि अरविन्द केजरीवाल इन सब मुद्दों को दरकिनार करके मुद्दों पर ही कायम रहे।

लेकिन यह कहना बहुत मुश्किल है की बिहार विधानसभा में ऊँट किस करवट बैठेगा। 

Monday, October 5, 2015

आपकी आवाज़: आज़म खान को एक खुला पत्र! पाकिस्तान की तरह वर्ताव कर रहे है आजम खान!

आपकी आवाज़: आज़म खान को एक खुला पत्र! पाकिस्तान की तरह वर्ताव कर रहे है आजम खान!

आज़म खान को एक खुला पत्र! पाकिस्तान की तरह वर्ताव कर रहे है आजम खान!

आज़म खान के नाम एक खुला पत्र!

पाकिस्तान की तरह व्यवहार कर रहे है आज़म खान!

कल एक ख़बर आई दादरी घटना को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और मुसलमानों के सबसे बड़े रहनुमा  आज़म खान ने UNO यानि संयुक्त राष्ट्र को चिट्ठी लिखी इन सब के बावजूद कि यह घटना भारत का पूरी तरह से आंतरिक ममला है। इस घटना की निंदा सभी समाज, सम्प्रदाय और प्रबुद्ध वर्ग के लोगों ने अपने अपने तरीके से किया।

आज़म खान के इस वर्ताव को पाकिस्तान के उस कृत्य से तुलना की जाय जिसमे वह कश्मीर मसले को लेकर UNO चले जाता है तो कम नहीं होगा। आज़म खान से मैं यह उम्मीद करता हूँ कि दादरी घटना के साथ नीचे दी हुई घटना को भी लिखा होगा।  

- किस तरह से इस्लाम को मानने वाले मुग़ल शासको ने हमारी विरासत को तोडा तहस नहस किया और हिन्दूओ को अपनी क्रूरता के बल पर इस्लाम में परिवर्तित कराया। 

- किस तरह से आजादी के समय बटवारे के दौरान इस्लाम को मानने वाले लोगों ने सिक्खों और हिन्दुओ के माँ बहनो के साथ घृणित काम किया और उनका बेरहमी से खून किया।  

- उन्होंने यह भी लिखा होगा 1992 में मुम्बई में बम धमाके करवा कर सैकड़ो मौसमो की जान लेने वाले किस धर्म को मानने वाले थे।  

-उन्होंने यह भी लिखा होगा कश्मीर में कश्मीरी पंडितो को अपने ज़मीन हक़ से जुदा करने वाले कौन लोग है और आज भी कश्मीरी पंडित अपने ही देश में शरणार्थी की तरह रह रहे है।  

- आज़म खान को यह भी लिखना चाहिए किस तरह से 2002 में गोधरा स्टेशन पर ट्रेन के दरवाजे बंद कर कारसेवकों को जिन्दा जला दिया गया था वह किस धर्म को फॉलो करने वाले लोग थे।  

- आज़म खान को यह भी बताना चाहिए कश्मीर में आये दिन पाकिस्तान और isi का झंडा किस धर्म और सम्प्रदाय के लोग कर रहे हैं।  

आज़म खान साहब मझे जावेद अख़्तर साहब का एक स्टेटमेंट याद आ रहा है जिसमें उन्होने ने कहा था "आप एक बार पाकिस्तान और कट्टर इस्लामिक देशो का दौरा करके आइये यहाँ की धरती को चूमेंगे" और आप हमारे अंदरूनी मसले को UNO में ले जा रहे है। आप मुसलमानो के रहनुमा है या इंसानियत के। आप के अनुसार इस देश में मुसलमानो के साथ अत्यचार हो रहा है उससे कम दलितों और पिछड़ों पर नहीं हो रहा है। क्या आप ने उनके आवाज़ को उठाने की कोशिश की। अगर आप जैसे नेता को मौका मिले इस देश को इस्लामिक मुल्क बना दिया जाय तो क्या मना कर देंगे।  

एक सप्ताह पहले ही हुई घटना को मैं भुला नहीं हूँ जिसमे एक मुस्लिम पिता ने छोटी से बच्ची को इस लिये मौत के घाट उतार दिया क्योकि उसका दुपट्टा सिर से उतर गया था। क्या आपने उस घट्ना की भर्त्सना की। इस मुल्क में मुस्लिम लड़कियां टी शर्ट और जीन्स भी पहनती है आप उनका पहनावा तय नहीं कर सकते।  

दादरी या इस तरह की दूसरी घटनाये भारत का अंदरूनी मामला है और जबकि आप ने इस मसले को अन्तर्राष्ट्रीय मंच पर उठाया है तो क्या अखिलेश सरकार आरोपी युवको पर मुकदमा उठाने की इजाज़त देगी क्योकि मसला UNO में है। इस मामले में गिरफ्तार युवको को छोड़ दिया जायेगा क्योकि मामला UNO में है।  

मैं निजी तौर आपके इस कृत्य की निंदा करता हूँ। हिंदुस्तान में किसी भी सेक्टर में हिन्दू मुसलमानो को बराबर का दर्जा दिया जाता है। आज इस देश में मुसलमान भी हर क्षेत्र में सर्वोच्च पदों पर बैठा हुआ है। कृपया हिन्दू- मुसलमान के आधार पर इस समाज को मत बांटिये। 

इस बात को स्वीकार करना पड़ेगा आज मुस्लिम समाज रूढ़िवादियों और इस्लाम के कुछ कट्टर नियम कानून से बधा पड़ा है उनसे मुसलमानो को मुक्त कराईये और उन्हें उदारवादी प्रवित्ति की तरफ मोड़िये। 

Friday, September 11, 2015

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का बड़बोलापन।

इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हिंदी के अच्छे वक्ता हैं लेकिन कभी कभी उनके लिये यह उल्टा पड़ जाता है।

आज एक बार फिर नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर जमकर हमला बोला। शायद अभी भी चुनावी माहौल से नहीं निकल पायें है।

कुछ दिन पहले ही बिहार में जिस तरीके से मोदी जी ने विशेष पैकेज का ऐलान किया उसकी काफी आलोचना हुई।

एक झलक!

Friday, August 21, 2015

Ex NSG Commando और दिल्ली कैंट से आम आदमी पार्टी के विधयाक सुरेन्द्र सिंह गिरफ्तार।

दिल्ली में आज आदमी पार्टी के लिहाज से बुरा दिन रहा। दो महत्वपूर्ण घटनायें घटी।

इस बात के कयास कई दिनों से लगाये जा रहे थे जीतेन्द्र तोमर के बाद आम आदमी पार्टी के अन्य विधायक किसी न किसी आरोप में गिरफ्तार किये जा सकते है।

कल शाम दिल्ली कैंट से आम आदमी पार्टी के विधायक और पूर्व NSG कमांडो सुरेन्द्र सिंह को NDMC के एक कर्मचारी के साथ मारपीट के आरोप और जाति सूचक शब्द इस्तेमाल करने पर गिरफ्तार कर लिया और आज सुबह अदालत में पेश किया जायेगा।

दूसरी बड़ी घटना एक आयोग बनाने को लेकर रही। पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित पर आरोप ऑटो में CNG किट लगाने को लेकर आरोप है जिसका खुलासा 2012 में हुआ था जिसमे LG नजीब जंग भी जाँच के घेरे में है।

कुछ दिन पहले ही दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने  एक सदस्यीय जाँच आयोग का गठन किया था और भारत सरकार के गृहमंत्रालय ने यह कहकर रोक लगा दी कि जाँच आयोग का गठन सिर्फ LG कर सकते है।

अब सवाल यह उठता है भला जिसके ऊपर खुद घोटाले का आरोप लगा हो वह भला खुद के खिलाफ जाँच आयोग का गठन क्यों करेगा।

क्या इससे मोदी सरकार के भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने की प्रतिबद्धता कमजोर नहीं होती है।

शाब्दिक त्रुटि के लिये मैं आप से अग्रिम माफ़ी मागता हूँ।

पढ़े और अपने कमेंट जरूर दे।

Tuesday, April 15, 2014

शादी का भांडा फोड़ने वाले पत्रकार दर्शन देसाई (तब इंडियन एक्सप्रेस में) ने 2002

जशोदाबेन के मुताबिक शादी के सारे फोटो मोदी ने फाड़ डाले थे, "क्योंकि वे नहीं चाहते थे कि एक भी फोटो मेरे पास बचा रह जाय"। अर्थात मोदी ने शादी का कोई सबूत नहीं छोड़ा। सार्वजनिक तौर पर उन्होंने कभी पत्नी या शादी का जिक्र नहीं किया; विधानसभा के नामांकन पत्रों में चार बार वैवाहिक स्थिति का जवाब टाल गए। मोदी के जीवनीकार नीलांजन मुखोपाध्याय इसकी वजह यह मानते हैं कि मोदी आरएसएस के प्रचारक होकर देश के भ्रमण पर निकलना चाहते थे, लेकिन तब उत्तर प्रदेश को छोड़कर सभी प्रदेशों में प्रचारक बनने की यह अहम शर्त थी कि वे अविवाहित हों। मोदी ने संघ से एक बड़ा सच छुपाया, दूसरों शब्दों में पत्नी ही नहीं संघ को भी धोखे में रखा। माना जाता है कि कई साल बाद जब विवाह का भांडा फूट गया तब विवाहित प्रचारक होने की अप्रिय चर्चा से संघ को बचाने की गरज से मोदी को भाजपा में भेज दिया गया। 

शादी का भांडा फोड़ने वाले पत्रकार दर्शन देसाई (तब इंडियन एक्सप्रेस में) ने 2002 में जब जशोदाबेन को ढूंढ़ निकाला, वे रजोसाणा गांव में पढ़ा रही थीं। वे सौ रुपए महीने के किराए पर एक बगैर शौचालय वाले घर में बसर करती थीं। पति के मुख्यमंत्री बनने पर उन्होंने बड़े उत्साह से अपनी बदली अपने गांव में करवाने की अर्जी लगाई। मोदी की भरोसेमंद आनंदीबेन पटेल राज्य की शिक्षा मंत्री थीं। उन्होंने अर्जी खारिज कर दी। यह सब जानकारियां लेकर दर्शन देसाई जब गांधीनगर लौटे तो खुद मोदी ने उन्हें फोन कर कहा -- "तुम मेरे खिलाफ लिख रहे हो। तुम्हारे अखबार ने 'मोदी मीटर' (गुजरात दंगों पर स्तंभ) चला रखा है। मुझे पता है कि आज तुमने क्या किया। तुमने जो किया, उससे बात बहुत आगे खिंच गई है। इसलिए मुझे बताओ कि तुम्हारा एजेंडा (मकसद) क्या है?" देसाई के मुताबिक वे डरे तो नहीं, लेकिन कुछ नर्वस जरूर हो गए। उन्होंने जवाब दिया -- "मेरा कोई एजेंडा नहीं है। आप मेरे संपादक से बात कर सकते हैं।" तब मोदी ने फोन काटने से पहले यह कहा -- "ठीक है, सोच लेना।"

क्या मोदी का यह बर्ताव विवाह को लेकर उनकी छुपमछुपाई का अपराधबोध प्रकट नहीं करता?

Sunday, April 13, 2014

दुनिया के इतिहास में कब इतने सारे पूंजीपतियों ने एक आदमी के अभियान में इतना पैसा लगाया


ये गरीबों से कहते हैं गरीबी हटा देंगे ! कैसे ? दुनिया के इतिहास में कब इतने सारे पूंजीपतियों ने एक आदमी के अभियान में इतना पैसा लगाया है गरीबी हटाने के लिए ? जो पैसा लगाता है वो वसूल करना भी जानता है | इसकी वसूली देश से होगी | गरीबी हटानी होती तो हटा चुके होते गजरात से जहां PDS और पब्लिक हेल्थ सिस्टम की व्यवस्था बदतर हुई है, शिशु मृत्यु दर और मातृ मृत्यु दर आर्थिक समृद्धि के बावजूद अधिक है, दलित और आदिवासी बच्चों की शिक्षा की स्थिति राष्ट्रीय औसत तक भी नहीं !
 


ये युवाओं से कहते हैं सबको रोजगार देंगे ! The Week की कवर स्टोरी पढ़िए ! गुजरात में 5300 रूपये की नौकरी के लिए 8 लाख़ से ज्यादा युवकों ने apply किया | वहाँ 12 साल में नहीं हटी बेरोजगारी पर युवाओं का वोट चाहिए तो ख़्वाब उछाल देते हैं मंच से |

ये कहते हैं भ्रष्टाचार और वंशवाद हटायेंगे ! इन्होने चुन चुन कर देश भर के भ्रष्ट नेताओं को बटोरा है, परिवारवाद के आधार देशभर में तमाम उम्मीदवार दिए हैं, गुजरात में RTI आवदेन भरना UPSC (सिविल सर्विसेस) का exam पास करने से ज्यादा मुश्किल है ! – क्या वाकई मुकाबला करेंगे ये भ्रष्टाचार से, वंशवाद से?
बिहार पहला राज्य है जिसने भ्रष्टाचार के खिलाफ स्पेशल कोर्ट अधिनियम लागू किया, भ्रष्ट अधिकारियों की सम्पति ज़ब्त की, उसमें स्कूल खोले ! बिहार पहला राज्य है जहाँ टेलीफोन के माध्यम से RTI फ़ाईल करने का system बना, उस समय के RTI Activist श्री Arvind Kejriwal ने हमें दिया था सुझाव ! RTI सिस्टम के लिए बिहार को राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है !

ये किसानों से कहते हैं समृद्धि देंगे – यदि गुजरात में किसान इतने समृद्ध हैं तो कपास की खेती में लाखों बाल मज़दूर क्यों काम कर रहे हैं ? बिहार में तो किसान विश्व रिकार्ड बना रहे हैं ! हमें मिला है राष्ट्रीय कृषि कर्मण पुरस्कार !

फिर भी आप नहीं फंसे तो कहेंगे 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' – जिनके मंत्री कहते हैं बिहारियों के चलते गुजरात में गरीबी बढ़ी है, जिनकी पूरी पार्टी बिहारियों को जलील करने वालों के आगे नतमस्तक हो, इनके नेता अनेक स्थानों पर जाकर प्रतिशोध की आग भड़का रहे हों यह कहकर कि बदला लेंगे, हर विवादित मुद्दे पर polarise कर रहे हों, ये बनायेंगे एक भारत? एकमात्र सांस्कृतिक एजेंडा हो राम मंदिर - ये बनायेंगे श्रेष्ठ भारत?

इस देश में बदलाव का shortcut नहीं है ! बदलाव तभी संभव है जब वोट पड़े ईमानदारी से काम करने वाले दल को, साफ़-सुथरे ढंग से चुनाव लड़ने वाले दल को, और प्रमाणित ideas पर विज़न देने वाले नेतृत्व को | जय बिहार, जय भारत !

इस पोस्ट के अंश बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतिश कुमार के फेसबुक वाल से लिया गया है।

Saturday, April 12, 2014

रजत शर्मा मोदी से ये सवाल पूछने की हिम्मत कर पाटा है या नहीं?

आज रात को रजत शर्मा के शो में नरेन्द्र मोदी का इंटरव्यू होने वाला है, देखते है रजत शर्मा मोदी से ये सवाल पूछने की हिम्मत कर पाटा है या नहीं?
- सौरभ पटेल जो अम्बानी का दामाद है उसे आपने तेल और ऊर्जा मंत्री क्यों बनाया?
-सत्ता में आने के बाद आप अम्बानी को गेस के दाम कितने देंगे? 4 डॉलर, 8 डॉलर या 16 डॉलर?
-तमिलनाडू में आपने LTTE का समर्थन करने वाली वाइको कि पार्टी MDMK से हाथ मिलाया है, MDMK ने अपने घोषणा पत्र में लिखा है कि NDA कि सरकार बन्ने के बाद वो LTTE से प्रतिबन्ध हटा देगी और भारत का नाम United States of India कर देगी? क्या आप इसका समर्थन करते है?
-CAG कि रिपोर्ट के मुताबिक़ आपकी सरकार ने कुछ औद्योगिक घरानों को गैरकानूनी फायदा पहुचाया है, क्यों?
-क्या आप चाहते है कि आपकी पार्टी RTI के दायरे में आये?
-आपकी पार्टी को दिया गया 85% चंदा बेनामी क्यों है?
-बीजेपी और कांग्रेस को दिल्ली हाई कोर्ट ने वेदांता नाम कि ब्रिटिश कंपनी से चंदा लेने के अपराध में दोषी करार दिया है! इस पर आप क्या कहना चाहेंगे?
-क्या ये सच नहीं है कि हाल ही में गांधीनगर में 1000 RTI कार्यकर्ताओं ने भूख हड़ताल की थी, क्युकी गुजरात में 50000 से ज्यादा RTI पेंडिंग पड़ी है?
-गुजरात में जो लचर लोकायुक्त कानून लाया गया है, उसमे ये लिखा है कि मुख्यमंत्री ही तय करेगा कि लोकयुकित की रिपोर्ट को माना जाए या नहीं, फिर लोकायुक्त का क्या मतलब हुआ?
-क्या ये सच है कि गुजरात के लोकायुक्त में ये लिखा है कि जांच पूरी होने के बाद भी कोई भी पत्रकार यदि जांच के बारे किसी भी चेनल या अखबार में लिखता है तो उस पर कार्यवाही होगी?
-लोकायुक्त की किसी भी जांच को आप रोक सकते है, अगर वो किसी मंत्री के खिलाफ हो तो, क्या ये सच है?
-क्या ये सच नहीं है कि कच्छ के सिख किसानों की ज़मीने आपने छीनी है? अगर नहीं तो उन्होंने आन्दोलन क्यों किआ है?
-क्या ये सच नहीं है कि गुजरात बीजेपी के नेता शंकर चौधरी और अन्य लोगों ने सोलर प्लांट की ज़मीन किसानों से कोंडियों के भाव खरीद कर 27 लाख/एकड़ के हिसाब से बेचीं?
-क्या ये सच नहीं है कि अदानी को 30 साल तक के लिए आपने ज़मीने 60 पैसा/एकड़ के हिसाब से दी है?
-2002 में चुनाव लड़ रहे लोगों को अपनी सम्पाती और आपराधिक मुकदमों का ब्यौरा देने वाले सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को बीजेपी कि सरकार ने अध्यादेश लाकर पलटने की कोशिश क्यों की थी?
-आप गांधी परिवार और वंशवाद के खिलाफ अपनी हर रेल्ली में बोलते है, मगर चुनाव आप दो सीटों से लड़ रहे है वो दोनों भी सेफ सीट है, ऐसा क्यों? आप खुद राहुल गांधी के खिलाफ अमेठी से चुनाव क्यों नहीं लड़ना चाहते? क्या मैच फिक्स है?
-आपके मुख सलाहकार को चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश में साम्प्रदायिकता फैलाने के जुर्म में रेली करने से रोका है, इस पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है?
-राजस्थान में बीजेपी कि वसुंधराराजे कि सरकार ने चुनावों से पहले अशोक गहलोत के खिलाफ जो ब्लैक पेपर निकाला था...उसमे 3.4 लाख करोड़ के ज़मीन घोटाले का ज़िक्र था...अब उसी घोटाले में हाई कोर्ट में वसुंधरा राजे शपथ पत्र देकर "जीरो लोस" बता रहे है! बीजेपी को इस बड़ी राशि में से कितना हिसा मिला है?
-गुजरात की 26 सीटों में से 10 पर अपने पूर्व कांग्रेसियों को टिकिट दिया है! जो कांग्रेसी पहले भ्रष्ट थे वो अब पाक साफ़ कैसे हो गए?
-रोबर्ट वाड्रा पर आप अपनी रेली में बोलते है मगर राजस्थान में जो ज़मीने वाड्रा को कोडियों के दाम अशोक गहलोत ने दी थी, उस पर आपकी सरकार क्या कार्यवाही कर रही है?
-बाबु भाई बोखादिया को खनन घोटाले में अदालत ने दोषी पाया है, वो आपके मंत्रिमंडल में अभी तक क्यों है?
- एक हजार करोड़ के राशन घोटाले में जेल जा चुके पूर्व मुख्यमंत्री गेगांग अपांग बीजेपी में शामिल, क्यों?
-आप अदानी के हेलिकोप्टरों में उड़ते है, उसका किराया कौन देता है? बीजेपी या गुजरात सरकार? अगर बीजेपी देती है तो ये पैसा कहाँ से आया?
-क्या ये सच नहीं है कि पिछले 23 सालों सरकारी आंकड़ों के मुताबिक गुजरात में बेरोजगारी जस की तस है?
-क्या ये सच नहीं है कि एक RTI में हुए खुलासे के अनुसार गुजरात की सरकार ने आज तक अल्पसंख्यकों कि सुनवाई के लीये कोई भी आयोग गठित नहीं किआ है?
-आप गो-हत्या कि बात करते है, क्या ये सच नहीं है कि गुजरात में 1200 से ज्यादा गौचर भूमियों मर माफियाओं का कब्ज़ा है? कोर्ट के आदेश के बाद भी ये जैसा का तैसा क्यों है?
-आपने अपने चुनावी प्रचार और अपनी छवि चमकाने के लिए अमेरिकन कंपनी APCO वर्ल्डवाइड पर जो खर्चा किआ है, वो किसने दिया, बीजेपी ने या गुजरात सरकार ने? अगर बीजेपी ने दिया तो ये पैसा आया कहाँ से?
-आप विकास की बात करते है मगर 5 साल से निचे के 44% बच्चे गुजरात में कुपोषित है, क्यों?
-कुपोषण के मामले में पूरे भारत में सुधार हुआ है मगर सिर्फ गुजरात फिसड्डी साबित हुआ है, ऐसा क्यों?